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1971: महज 16 दिनों में पाकिस्तान के एक हिस्से को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया था भारतीय सेना ने

भारतीय सेना के पराक्रम और शौर्य गाथा सुनहरी लफ्जों में हर हिंदुस्तानी के दिल और जुबान पर लिखी हुई है, जिस पर हर हिंदुस्तानी गर्व करता है। लेकिन, अगर हम आज के दिन की बात करें तो भारतीय सेना और हर भारतीय के लिए आज का दिन बेहद विशेष है। आज पूरे भारत वर्ष में विजय दिवस मनाया जा रहा है। यह हमारी सेना पर गर्व करने का दिन है। क्योंकि, आज ही के दिन भारतीय सेना ने अपने पराक्रम और शौर्य के बल पर 1971 में पाकिस्तान के एक हिस्से को दुनिया के नक्शे से मिटाकर नए देश बांग्लादेश का निर्माण कर डाला था।

 

पाकिस्तान के खिलाफ 1971 का युद्ध महज 14 दिनों में हमने आज ही के दिन जीता था। हमने मात्र 14 दिन में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए ही मजबूर कर दिया था। 1971 का युद्ध सैन्य इतिहास की सबसे शानदार विजय थी। देश भर में 16 दिसम्बर को विजय दिवस  मनाया जाता है। वर्ष 1971 के युद्ध में करीब 3,900 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, जबकि 9,851 घायल हो गए थे।

16 Dec 1971. One of the shortest wars (13 days), one of the biggest surrenders. We pay tribute to the valour of Indian Military and Mukti Jodhas, who made this historic military victory possible.#VijayDiwas2018 #IndoPakWar71 @DefenceMinIndia @ihcdhaka @MEAIndia pic.twitter.com/qfGRu4RKs6

— Defence Spokesperson (@SpokespersonMoD) December 16, 2018

पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी बलों के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद 17 दिसम्बर को 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया गया।

 

युद्ध की पृष्ठभूमि साल 1971 की शुरुआत से ही बनने लगी थी। पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह याहिया ख़ां ने 25 मार्च 1971 को पूर्वी पाकिस्तान की जन भावनाओं को सैनिक ताकत से कुचलने का आदेश दे दिया। इसके बाद शेख़ मुजीब को गिरफ़्तार कर लिया गया। तब वहां से कई शरणार्थी लगातार भारत आने लगे।

 

जब भारत में पाकिस्तानी सेना के दुव्र्यवहार की ख़बरें आईं, तब भारत पर यह दबाव पडऩे लगा कि वह वहां पर सेना के जरिए हस्तक्षेप करे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थीं कि अप्रैल में आक्रमण किया जाए। इस बारे में इंदिरा गांधी ने थलसेनाध्यक्ष जनरल मानेकशॉ की राय ली।

तब भारत के पास सिर्फ़ एक पर्वतीय डिवीजन था। इस डिवीजन के पास पुल बनाने की क्षमता नहीं थी। तब मानसून भी दस्तक देने ही वाला था। ऐसे समय में पूर्वी पाकिस्तान में प्रवेश करना मुश्किलों से भरा काम था। मानेकशॉ ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से स्पष्ट कह दिया कि वे पूरी तैयारी के साथ ही युद्ध के मैदान में उतरना चाहते हैं।

 

लेकिन, पाकिस्तान ने अपनी नापाक हरकत का सबूत देते हुए 3 दिसंबर, 1971 को शाम के वक्त पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों ने भारतीय वायुसीमा को पार करके पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर, आगरा आदि सैनिक हवाई अड्डों पर बम गिराना शुरू कर दिया। इंदिरा गांधी ने उसी वक्त दिल्ली लौटकर मंत्रिमंडल की आपात बैठक की। इंदिरा गांधी पाकिस्तान के खिलाफ ऐलान करते हुए भारतीय सेना को खुली छूट दे दी। युद्घ् शुरू होने के बाद तेज़ी से आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने जेसोर और खुलना पर कब्ज़ा कर लिया।

 

इस युद्ध के दौरान एक बार फिर से इंदिरा गांधी का विराट व्यक्तित्व देखने को मिला। पाकिस्तान सेना द्वारा हथियार डालने तक, इंदिरा गांधी किसी दबाव के आगे नहीं झुंकीं। भारतीय सेना ने पूरी तरह पूर्वी पाकिस्तान पर कब्जा करने के बाद ही दम लिया। भारत ने महज 14 दिनों में यह युद्ध जीत लिया। इस युद्ध के बाद दुनिया के नक्शे पर एक नए देश बांग्लोदश का अस्तित्व सामने आया।

 

Photo Credit: ADG PI - INDIAN ARMY

 

 

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