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एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान सरकार कृत संकल्प: परसादी लाल मीणा

फिक्की ने ‘राजस्थान एमएसएमई समिट‘ का आयोजन किया

 

जयपुर, 26 जून 2020: कोरोना वायरस के चलते और लॉकडाउन के परिणामों ने व्यवसायों के लिए विशेष रूप से एमएसएमई के लिए गंभीर रुकावट पैदा की है। इसी विषय के अंतर्गत, फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा अतंर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के एक दिन पूर्व आज ‘राजस्थान एमएसएमई समिट‘ के चैथे संस्करण का वर्चुअल आयोजन किया गया। इस समिट की थीम ‘आत्मनिर्भर राजस्थान के लिए पुनः सशक्त एमएसएमईज़‘ रखी गई थी।

 

राजस्थान के उद्योगमंत्री श्री परसादी लाल मीणा ने राज्य सरकार द्वारा उद्योगों के विशेषकर एमएसई के विकल्प व प्रोत्साहन के लिये किये जाने वाली योजनाओं की जानकारी दी। श्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि, ‘‘राज्य सरकार एमएसई को बढ़ावा देने में कृत संकल्प है। इसी के तहत हम एमएसएमई एक्ट लाये, जिसमें 3 साल तक उद्योगपति को किसी तरह की स्वीकृति से मुक्त रखा गया। इसमें उद्योग मित्र पोर्टल से बेहद आसानी से स्वीकृति लेकर काम शुरू किया जा सकता है। इस पोर्टल के माध्यम से लगभग 5000 उद्यमी सरकार की इस सुविधा का लाभ उठा चुके है। इसके अलावा मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन रोजगार योजना के लिए 5 साल में 250 करोड़ रूपयों का बजट रखा है। इसके अंतर्गत उद्योगपतियों को सब्सिडी भी दी जायेगी।‘‘ राजस्थान के उद्योगपति राज्य में ही उद्योग लगाये इसके लिये राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम के अंतर्गत उद्योगपतियों को 5 से 7 वर्ष की अवधि के लिये एसजीएसटी में 75 प्रतिशत से 100 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

 

समिट को संबोधित करते हुए, फेडरेशन ऑफ राजस्थान एक्सपोर्टर्स के प्रेसीडेंट श्री राजीव अरोड़ा ने कहा कि, आत्मनिर्भर भारत व राजस्थान के लिए आवश्यक है कि यह भावनाओं तक न सीमित रहे, इसको धरातल पर लाने के लिए आधारभूत संसाधनों का विकास, अनुसंधान व विकास पर व्यय, उद्यमियों को प्रोत्साहन आदि कार्यों को बढ़ावा देना होगा। कोरोना काल में राज्य सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के चलते उद्योग जगत अन्य राज्योे की तुलना में सामान्य हो रहा है। उन्होनंे यह भी बताया कि जयपुर का रत्न एवं आभूषण उद्योग अब ट्रैक पर वापस आ रहा है और वहीं मुंबई और सूरत में रत्न और आभूषण उद्योगों अभी भी बंद हैं। श्री अरोड़ा ने बताया कि जो प्रवासी श्रमिक राजस्थान में लौट आये है उन्हे प्रशिक्षण व रोजगार उपलब्ध कराने के लिये हम पूरी तरह से तैयार है और इस संबंध में उन्होने प्रस्ताव राज्य सरकार व उद्योग तथा श्रम मंत्रालय को प्रस्तुत किया है। उन्होने बताया कि, भारत को एक आत्मनिर्भर भारत के लिए अनुसंधान और विकास पर बहुत अधिक बजट खर्च करने की आवश्यकता है और आरएंडडी के साथ-साथ देश में बड़े पैमाने पर नवाचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत, विशेष रूप से राजस्थान में स्थापना के संबंध में उद्योगों में अतंराष्टीय परिदृश्य से लाभ पाने के लिए हमारी आयात और निर्यात नीतियों में बदलाव करने का भी उल्लेख किया।

 

नेशनल स्माॅल इन्डस्ट्रीज़ काॅपरेशन (एनएसआइसी) के जोनल महाप्रबंधक-सेन्ट्रल जोन, श्री प्रभात कुमार झा ने कहा कि, हम एमएसएमईज के साथ मिलकर कम उपलब्धता वाले कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे है। उन्होनंे बताया कि, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आर्थिक पैकेज की नवीनतम घोषणा से एमएसएमईज को उनके खराब आर्थिक संकट से बाहर निकालने में मदद करने मिलेगी जो कि आशा की एक किरण की तरह है। कोविड़ 19 के दौरान जब अन्य देश एक-दूसरे पर निर्भर थे, भारतीय एमएसएमईज ने विभिन्न उत्पादों और दवाओं, मास्क और अन्य कोविड़ की आपूर्ति करके 100 से अधिक देशों की मदद की। उन्होने कहा कि हमें संकट के समय में ही नहीं आत्मनिर्भर होने कि जरूरत नहीं है, हमें इसे जीवन मंत्र बनना होगा। क्योंकि हमारे एमएसएमईज में हर चीज को बेहतरीन बनाने की क्षमता और कुशलता है जो कि हमें न केवल स्थानीय रूप से परन्तु विश्व स्तर पर भी निर्यात करने का अवसर प्रदान करेगी। 

 

स्टेट बैंक आॅफ इंडिया के जनरल मैनेजर श्री गोविन्द सिंह रावत ने बताया कि ‘‘कोविड़ 19 के अकल्पनीय दौर में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया द्वारा एमएसई सेक्टर के लिए विशेष कदम उठाये गये है। अप्रैल माह में ही विशेष योजना के तहत ऋणी उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण की सुविधा प्रदान की गयी। वहीं भारत सरकार की गांरटीड इमरजेंसी के्रडिट लाइन के तहत राजस्थान में 1100 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये है जिसमें 800 करोड़ रूपये का वितरण भी हो चुका है। इनके अलावा ई-मुद्रा स्कीम के तहत 50 हजार रूपयों तक का ऋण बिना ब्रांच में आये, डिजीटल रूप से प्राप्त किया जा सकता है।‘‘

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