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फ्रांस के चार्ल्स मिशेल डी एल एपी को कहा जाता है फॉदर ऑफ डीफ, गूगल ने बनाया डूडल

सर्च इंजन गूगल ने फ्रांस के चार्ल्स-मिशेल डी एल एपी के जन्मदिन पर सुनने में असमर्थ यानि बहरे बच्चों का डूडल बनाया है। गूगल ने यह डूडल चार्ल्स -मिशेल डी एल एपी को समर्पित किया है। आज फ्रांस के चार्ल्स -मिशेल डी एल एपी जन्मदिन है। चार्ल्स को बधिर (न सुन पाने वाले) बच्चों के पिता फॉदर आफ डीफ यानि बहरों के पिता की संज्ञा दी जाती है।

 

1760 में उन्होंने फ़्रांस की पहली ऐसी स्कूल खोली, जहां सुनने में असमर्थ लोगों को सांकेतिक भाषा या चिन्ह प्रणाली भाषा सिखाई जाती थी। इस भाषा के इस्तेमाल से ये लोग अपनी बातों को दूसरे तक पहुंचा सकते थे। चार्ल्स मिशेल डी l एपी की बनाई चिन्ह भाषा को पहली फ़्रांस की चिन्ह भाषा कहा जाता है।

 

इनके द्वारा बनाई गयी यह भाषा इतनी आसान थी कि कई दशकों के बाद इसे अमेरिका द्वारा अपनाया गया। चार्ल्स ने अपना सम्पूर्ण जीवन ऐसे बच्चों को सर्मपित कर दिया था। चाल्र्स-मिशेल डी एल एपी को श्रवण-दिव्यांग को पढ़ाने की व्यवस्थित विधि बनाने का श्रेय भी दिया जाता है।

 

चार्ल्स के 306वें जन्मदिन पर, गूगल ने डूडल बना कर इस संदेश को दिया है कि श्रवण-दिव्यांग लोग सीखने में असमर्थ नहीं हैं। 1712 में वर्साइल्स में पैदा हुए, चाल्र्स पेरिस में दान के काम पर ध्यान केंद्रित करने से पहले धर्मशास्त्र और कानून का अध्ययन किया था। उनके पिता एक आर्किटेक्ट थे।

 

गौरतलब है कि चाल्र्स उन लोगों के लिए एक मसीहा थे जो सुन नहीं सकते थे. साथ ही बधिर बच्चों को अपना जीवन समर्पण करने के चलते हम चाल्र्स-मिशेल डी एल एपी को हमेशा याद रखेंगे.

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Tazaa Khabre