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मजबूत सरकार चाहता है देश, महागठबंधन विफल प्रयोग : मोदी
 महागठबंधन विफल प्रयोग, देश मजबूत सरकार चाहता है : मोदी

नई दिल्ली, 12 जनवरी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विपक्षी महागठबंधन को एक 'विफल प्रयोग' करार देते हुए इसे खारिज कर दिया और कहा कि ये सभी राजनीतिक दल सिर्फ एक व्यक्ति को हराने के लिए एकजुट हो रहे हैं, ताकि एक 'मजबूर' सरकार बना सकें, जबकि देश एक 'मजबूत' सरकार चाहता है। अपनी सरकार में एक भी घोटाला नहीं होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह सबूत है कि सरकार बिना भ्रष्टाचार के भी चल सकती है।

 

यहां रामलीला मैदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद में अपने समापन भाषण में विपक्षी दलों पर जमकर बरसते हुए उन्होंने कहा कि वे 'स्व हित' के लिए एकजुट हो रहे हैं, जबकि भाजपा नीत राजग सरकार राष्ट्रहित के लिए लड़ रही है।

 

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाने वाले अधिकतर क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, "इन दिनों महागठबंधन के प्रचार के लिए एक अभियान चल रहा है। महागठबंधन भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक विफल प्रयोग है। वे राजनीतिक दल, जो एक जमाने में कांग्रेस के तौर-तरीकों को सही नहीं मानते थे, वे आज एकजुट हो रहे हैं।"

 

जिला स्तर से लेकर शीर्ष पदाधिकारियों सहित 12 हजार प्रतिनिधियों से उन्होंने कहा, "वे राजनीतिक दल एकजुट हो रहे हैं, जो कभी कांग्रेस के तौर तरीकों से सहमत नहीं थे। जब सबसे पुरानी पार्टी के बड़े-बड़े नेता जमानत पर हैं, तब ये दल कांग्रेस के सामने सरेंडर कर रहे हैं।"

 

उन्होंने कहा, "वे दल (क्षेत्रीय पार्टिया) जो कांग्रेस के खिलाफ विकल्प के रूप में उभरे थे, उन्होंने लोगों के विश्वास और जनादेश के साथ धोखा किया है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "जब ऐसे गठबंधन आकार लेते हैं तो उन राज्यों की सरकारें राजनीतिक मजबूरियों के अंतर्गत कार्य करती हैं। कर्नाटक, मध्यप्रदेश और राजस्थान में हालिया घटनाक्रम इसके उदाहरण हैं।"

 

उन्होंने कहा, "कर्नाटक के मुख्यमंत्री (एच.डी.कुमारस्वामी) का कहना है कि वह मुख्यमंत्री की तरह नहीं बल्कि एक क्लर्क की तरह कार्य कर रहे हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में सरकार को सहयोगियों द्वारा मामलों को वापस लेने या परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है।"

 

मोदी ने इन घटनाओं को महागठबंधन का ट्रेलर करार दिया

 

मोदी ने कहा, "राजनीति विचारधाराओं के आधार की जाती है और गठबंधन दृष्टिकोण के आधार पर बनते हैं, लेकिन पहली ऐसा हो रहा है, जब सभी एक व्यक्ति के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।"

 

उन्होंने कहा, "आपको समझने और लोगों को यह समझने की जरूरत है कि उनके इरादों के पीछे क्या है। उन्होंने 'मजबूर' सरकार बनाने के लिए हाथ मिलाया है, क्योंकि वे एक मजबूत सरकार नहीं देखना चाहते, जिसने सभी भ्रष्ट गतिविधियों को समाप्त कर दिया है।"

मोदी ने कहा, "वे अपने परिवार और रिश्तेदारों का भला करना चाहते हैं, जबकि देश एक मजबूत सरकार चाहता है, ताकि सभी का विकास हो सके। वे ऐसी सरकार चाहते हैं, जो रक्षा सौदों में दलाली कर सके, जबकि देश एक मजबूत सरकार चाहता है, जो सशस्त्र बलों की हर जरूरतें पूरी करे।"

 

उन्होंने कहा, "वे एक असहाय सरकार चाहते हैं, ताकि वे किसानों की कर्जमाफी के नाम पर घोटाले कर सकें, जबकि हम किसान को सशक्त बनाने के लिए एक मजबूत सरकार चाहते हैं। वे एक ऐसी सरकार चाहते हैं, जिसमें यूरिया घोटाला हो सके, जबकि हम एक ऐसी सरकार चाहते हैं, जिसमें किसानों को समय पर खाद और उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल सके।"

 

संप्रग शासन के दौरान कथित 2जी, 3जी और सीडब्ल्यूजी जैसे विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर हमला बोला और कहा कि उनकी सरकार बच्चों को आधुनिक सुविधाएं दे रही है, ताकि वे ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

 

उन्होंने कहा, "हम एक मजबूत सरकार चाहते हैं, ताकि देश में हर कोई डिजिटल इंडिया मिशन का लाभ उठा सके। देश गगनयान की सफलता पर गर्व महसूस कर सके, और देश को खदानों से लाभ मिल सके।"

 

अपनी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 10 करोड़ परिवारों को मुफ्त इलाज देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि विपक्ष एक ऐसी सरकार चाहता है, जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में घोटाले कर सके। प्रत्येक पार्टी कार्यकर्ता से अपना बूथ मजबूत करने को सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में पार्टी को फिर से सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता है।

 

उन्होंने कहा, "पिछले चार वर्षों ने हमें सिखाया है कि कुछ भी असंभव नहीं है। हमने इसे संभव बनाया है। जब हमने कार्यभार संभाला था, तो हमें एक कमजोर नींव विरासत में मिली थी। आज हमारी नींव मजबूत हो रही है। कल्पना करें कि एक बार फिर से पांच साल का कार्यकाल मिलने पर क्या होगा।

 

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