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कुपोषण से लड़ने के लिए राजस्थान ने की अनूठी पहल

जयपुर।  प्रधानमंत्री मोदी के 'कुपोषण मुक्त भारत' के सपने को साकार करने के लिए, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार नें आज कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई को मज़बूत करने के लिए अपनी सामाजिक और व्यहार परिवर्तन रणनीति का विमोचन किया।  प्रधानमंत्री नें राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्घाटन 8 मार्च 2018 को झुंझुनू से किया था जिसमे उन्होंने सामूहिक भागीदारी पर ज़ोर दिया था।

 

रणनीति का विमोचन करते हुए, महिला एवं बाल विकास मंत्री, अनीता भदेल नें कहा कि 'गर्भवती एवं स्तनपान करने वाली महिलाओं में व्याप्त कुपोषण सभी राज्यों के लिए चिंता का विषय है।  राजस्थान सरकार नें इसके निवारण के लिए अपनी कटिबद्धता को सुढृढ़ करते हुए सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन पर विशेष ज़ोर दिया है।  भदेल नें घरेलु तथा सामाजिक स्तर पर व्याप्त कुप्रथाओं को दूर कर एक संवेदनशील परिवार और समाज को रणनीति का अभिन्न अंग बताया।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह में विभाग की प्रमुख सचिव  रोली सिंह नें प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा की 'रणनीति गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं को केंद्र में रखकर क्रिन्यान्वयन की प्रक्रिआओं पर बल देगी।' सिंह नें आगे बताया कि रणनीति में जीवन चक्र दृष्टिकोण को अपनाया गया है जो कि 'सुपोषित किशोरी' एक 'सुपोषित माँ' बनती है और 'स्वस्थ बच्चे ' को जन्म देती है के भाव से प्रेरित है।  यह रणनीति पति और सास की मातृ एवं बाल पोषण को सुदृढ़ करने में अहम् भूमिका को रेखांकित करती है।

 

कार्यक्रम में शामिल नवीन जैन, शासन सचिव चिकित्सा, स्वस्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा प्रबंध निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन नें बताया कि आमतौर पर माता - पिता कुपोषण को गंभीर समस्या नहीं मानते।  उन्होंने कहा कि 'हमें सिर्फ माताओं को ही नहीं बल्कि पिताओं को भी पोषण सुधार की प्रक्रिया से जोड़ना चाहिये'। अपने विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रम, पोषण प्रथम फेज, का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिताओं को जोड़ने से उन्हें उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए।  

यदुवेन्द्र माथुर, अतिरिक्त सचिव, निति आयोग, नें राजस्थान के इस पहल की सराहना करते हुए बताया की सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन राष्ट्रीय पोषण मिशन की प्राथमिकताओं में से एक है।  और राजस्थान इसके लिए व्यापक रणनीति बनाने वाला देश का शायद प्रथम राज्य है।

 

सिफ्फ़ (चिल्ड्रेन्स इन्वेस्टमेंट फण्ड फाउंडेशन), जिसने इस रणनीति के गठन को सहयोग प्रदान किया है, उसके भारत  प्रमुख, हिशम मुण्डोल नें व्यवहार परिवर्तन के साथ आर्थिक प्रोत्साहन की भूमिका को भी गंभीरता से लेने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में गर्भवती महिलाओं द्वारा पोषक तत्वों के सेवन को मानक स्तर पर लाने के लिए एक परिवार को औसतन 30 रूपए प्रतिदिन का निवेश करना होगा.

कार्यक्रम के अंत में शुचि शर्मा, आयुक्त समेकित बाल विकास सेवाएं, राजस्थान सरकार नें सभी विकास के साझेदारों को एक मंच पर आकर सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन के पहल को सफल बनाने का आह्वान किया।  उन्होंने रणनीति के गठन में सभी साझेदारों को सहयोग के लिए बधाई दी।

सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से अभिव्यक्त सरकार की सोंच और बढ़ते कदम प्रदेश में पोषण के स्तर में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल है. 

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