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आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला- जानिए अब कहां जरूरी है कहां नहीं

लंबे समय से निजता, डाटा लीक, गलत इस्तेमाल जैसे मुद्दों को लेकर आधार कार्ड (काननू) पर चल रही  बहस पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने अहम फैसले में आधार को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने आधार को लेकर एक सुनवाई में इससे जुड़ी कई चीजों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है, जबकि कई चीजों को जरूरी बताया है। अब कई जगहों पर आधार जरूरी होगा, जबकि कई जगहों पर गैर जरूरी। देश की सर्वोच्च अदालत ने कोर्ट ने बैंक, मोबाइल फोन और स्कूल एडमीशन आदि में आधार की अनिवार्यता खत्म कर दी है।

 

साथ ही साफ किया है कि सब्सिडी देने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए तो आधार जरूरी होगा। पैन और आधार के लिंक करने के आइटी कानून को कोर्ट ने सही ठहराया है। लेकिन कोई निजी व्यक्ति या कंपनी आधार की प्रमाणिकता नहीं मांग सकती।

 

सरकार की आधार योजना को बल देने वाला यह ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ ने चार एक के बहुमत से सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एके सीकरी, एमएम खानविलकर और जस्टिस अशोक भूषण ने कानून को संवैधानिक ठहराया है जबकि न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने बहुमत से असहमति जताते हुए कहा है कि आधार कानून और उसके नियम असंवैधानिक हैं। याचिकाकर्ताओं ने निजता के अधिकार का हनन बताते हुए आधार कानून रद करने की मांग की थी।

 

यहां देना जरूरी होगा आधार कार्ड

 

पैन और आधार को लिंक कराने के सरकारी फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है।

 

अब पैन कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा।

 

आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी आधार नंबर जरूरी होगा।

 

सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होगा।

 

यहां जरूरी नहीं आधार कार्ड देना

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि मोबाइल सिम के लिए कंपनी आपसे आधार नहीं मांग सकती।

 

बैंक भी अकाउंट खोलने के लिए आधार नंबर की मांग नहीं कर सकते हैं।

 

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि स्कूल ऐडमिशन के वक्त बच्चे का आधार नंबर नहीं मांग सकते।

 

सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं के लिए भी आधार जरूरी नहीं। बता दें कि इससे पहले इसके लिए आधार मांगा जा रहा था।

 

सीबीएसई, बोर्ड एग्जाम में शामिल होने के लिए छात्रों से आधार की मांग नहीं की जा सकती है।

 

14 साल से कम के बच्चों के पास आधार नहीं होने पर उसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली जरूरी सेवाओं से वंचित नही किया जा सकता है।

 

टेलिकॉम कंपनियां, ई-कॉमर्स फर्म, प्राइवेट बैंक और अन्य इस तरह के संस्थान आधार की मांग नहीं कर सकते हैं।

 

कोर्ट ने यह भी दीं हिदायत

 

सरकार बिना कोर्ट के आदेश के आधार का डेटा किसी प्राइवेट एजेंसी से शेयर नहीं करेंगी।

 

अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले।

 

अब प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।

 

मोबाइल और बैंक से आधार लिंक करना जरूरी नहीं

 

मोबाइल और बैंक से आधार को लिंक करने का सरकारी आदेश कोर्ट ने रद्द कर दिया।

 

कोर्ट ने पुराने खातों को आधार से लिंक नहीं कराने पर खाता फ्रीज करने की बात को गलत बताया।

 

कोर्ट ने कहा, ऐसा करना व्यक्ति को अपनी संपत्ति के अधिकार से वंचित करना है। ये नियम मनमाना है।

 

 राहुल गांधी बोले- बीजेपी के लिए उत्पीड़न और निगरानी का साधन:

 

आधार  को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आए अहम फैसले के बाद कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है, राहुल गांधी ने एक ट्वीट करते हुए कहा है कि कांग्रेस के लिए आधार सशक्तिकरण का साधन था। बीजेपी के लिए, आधार उत्पीडऩ और निगरानी का एक साधन है। कांग्रेस दृष्टि और सुरक्षा का समर्थन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए अपने अहम फैसले में आधार कानून के कई प्रावधान रद्द कर दिए।

देश की सर्वोच्च अदालत ने कोर्ट ने बैंक, मोबाइल फोन और स्कूल एडमीशन आदि में आधार की अनिवार्यता खत्म कर दी है। साथ ही साफ किया है कि सब्सिडी देने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए तो आधार जरूरी होगा। पैन और आधार के लिंक करने के आइटी कानून को कोर्ट ने सही ठहराया है। लेकिन कोई निजी व्यक्ति या कंपनी आधार की प्रमाणिकता नहीं मांग सकती। जबकि सरकार की लाभार्थी योजनाओं और सब्सिडी पाने वाली योजनाओं में आधार जरूरी होगा।

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