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कोरोना का कहर: कच्चे तेल की खरीद और क्या होता है बैरल, जानिए पूरा लेखा जोखा
petrol diesel

वैश्विक स्तर पर किसी भी देश का सूरत ए हाल उसकी अर्थव्यस्था से जाना जाता है। जिस देश की अर्थव्यस्था जितनी मजबूत होगी वह देश उतना ही मजबूत होगा। जबकि पूरे देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत पैमाना पेट्रोल पर टिका होता है। अर्थव्यवस्था पेट्रोल और उसकी कीमत पर ही निर्भर होती है। लेकिन फिलहाल पूरी दुनिया में कोराना वायरस ने तबाही मचा रखी है। इस वायरस के कारण पूरी दुनिया में अर्थव्यवस्था का आलम यह है कि  हर तरफ शेयर बाजार गिर रहा है और कच्चे तेल की कीमतें भी न्यनतम स्तर पर पहुंच रही हैं। जबकि भारत में अभी तेल की रिटेल कीमतों में ज्यादा गिरावट नहीं आई हैं। आइये जानते हैं वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर कितना असर पड़ता है और किस तरह कच्चा तेल खरीदा जाता है और कैसे भारत आते आते उसकी कीमतों में परिवर्तन होता है।

 

पेट्रोल डीजल पर केंद्र और राज्य सरकार का मिलाकर तकरीबन 50 पर्सेट टैक्स लागू है। जबकि जीएसटी का हाईएस्ट टैक्स स्लैब 28 पर्सेंट है। पेट्रोल-डीजल पर अगर जीएसटी लागू होता तो इसकी कीमतों में बीस रुपए तक की कमी आ सकती थी। अभी अगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को देखा जाए तो वो अपने न्यूनतम स्तर पर चल रही है। सरकारें विदेशों से तेल बैरल के हिसाब से खरीदती हैं।

 

जबकि अगर बैरल का लीटर में वॉल्यूम लगाया जाए तो 1 बैरल में 159 लीटर होता है। क्रूड ऑयल काले रंग का गाड़ा पदार्थ होता है जिसे ऑयल रिफाइनरी में रिफाइंड किया जाता है जिससे सबसे ऊंची रेंज का तरल पदार्थ पेट्रोल कहलाता है, इसके बाद डीजल और अन्य तरल पदार्थ निकलते हैं।

 

अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत 53.83 रुपए डॉलर प्रति बैरल है तो कच्चा तेल प्रति लीटर की कीमत 22 रुपए के करीब आंकी जाएगी, इस तरह एक लीटर कच्चे तेल की कीमत लगभग 21 रुपए 65 पैसे हो जाती है । कच्चे तेल को रिफाइनरी में रिफाइन किया जाता है, इसमें तकरीबन 10 रुपए प्रति लीटर का खर्चा आता है। अब केंद्र सरकार प्रति लीटर पर 21 रुपए 48 पैसे एक्साइज ड्यूटी लगाती है।

 

इसके बाद राज्य सरकारें प्रति लीटर पेट्रोल पर वैट वसूलती हैं। देश के ज्यादातर राज्यों में वेट की कीमत एक समान लगभग 25 प्रतिशत है। जबकि देश में सबसे ज्यादा पेट्रोल पर वैट महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 49 रुपए प्रति लीटर के करीब वसूला जाता है। जबकि दिल्ली में 27 पर्सेंट प्रति लीटर वैट लिया जाता है। डीलरों का कमीशन अगर इसमें जोड़ें तो भी करीब साढ़े तीन प्रति लीटर के करीब होता है। पेट्रोल की तरह डीजल पर भी यही टैक्स और प्रोसेस होते हैं। इस तरह कच्चा तेल रिफाइनरी से शुरु हो पेट्रोल-डीजल बनकर  पेट्रोल पंप के नोजल से गुजरते हुए अंत में आपकी गाडिय़ों तक पहुंचता है।

 

यूं समझिए तेल की कीमतें

 

कच्चा तेल    21 रुपए 65 पैसे

 

रिफाइन    10 रुपए प्रति लीटर

 

केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी    21 रुपए 48 पैसे

 

राज्य सरकार का वैट    25 फीसदी

 

डीलरों का मार्जिन (कमीशन)    3.25 पैसे

 

सभी आंकड़े अनुमानित लागत और कीमतों के आधार पर उपयोग किए गए हैं।

 

भारत की मुख्य तेल कंपनियां

 

हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, गैल, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन, गैल, एनटीपीसी लिमिटेड

 

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