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World No Tobacco Day: तम्बाकू छोड़ने से 50 फीसदी कम हो जाता है कैंसर का खतरा
World No Tobacco Day

तम्बाकू चाहे चबा कर खाया जाए या फिर सिगरेट के रूप में, नुकसान पहुंचाता ही है। स्मोकिंग (Smoking) करने वालों को ज़्यादातर लोग क्रिटिसाइज़ करते हैं कि वो ऐसा क्यों करते हैं? उनका शरीर खराब हो रहा है? कोई बड़ी बीमारी हो गई तो...लेकिन इन क्रिटिसाइज़ करने वालों को पता ही नहीं होता है कि स्मोकिंग करने वाले सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बीमार (Mental Health) होते जाते हैं। दरअसल निकोटिन सीधे दिमाग पर असर करता है।
डॉ आर के सोलंकी
 
नियमित तौर पर किया गया धूम्रपान दिमाग में कई ऐसे बदलाव कर देता है, जो आपको स्मोकिंग से दूरी नहीं बनाने देते हैं। और ऐसा न करने पर कई सारे व्यावहारिक बदलाव होते हैं, जो सामने वाले के साथ खुद स्मोकर को नुकसान पहुंचाते हैं। कई सारे शोध मानते हैं कि स्मोकिंग असल में रिलेक्स नहीं करती है, बल्कि ये तनाव और एंग्जाइटी बढ़ाने की वजह जरूर बन जाती है। दरअसल स्मोकिंग तुरंत रिलेक्स होने का एहसास कराती है, जिससे लगता है कि तनाव और एंग्जाइटी कम हो रहे हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं है। रिलेक्स होने की फीलिंग जल्द ही खत्म हो जाती है और फिर से स्मोकिंग करने को दिल मचलने लगता है।
 
जब भी घर या ऑफिस से उन्हें अनचाहा तनाव मिलता है तो उसका हल ना निकाल पाने का एहसास इंसान में सिरदर्द जैसी दिक्कत दे देता है। इस स्थिति में चिड़चिड़ापन घेर लेता है और इसे खत्म करने के लिए लोग स्मोकिंग करते है। पर तनाव तो घटने की बजाए बढ़ रहा होता है। यूके में एक शोध में पाया गया है कि अवसाद में स्मोकिंग करने वालों की संख्या उन लोगों की तुलना में दोगुनी है, जिनको अवसाद बिलकुल नहीं है।
 
 
सिगरेट में मौजूद निकोटिन का प्रभाव शरीर में सिर्फ 40 मिनट तक रहता है। यह असर खत्म होते ही फिर तलब उठने लगती है। नशे के स्तर को बनाये रखने के लिए व्यक्ति बार-बार धूम्रपान करता है। पर बिना डॉक्टरी परामर्श एक साथ तंबाकू की लत छोड़ने से भी कई बार बुरा असर देखने को मिलता है।
 
दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है तम्बाकू। इसके सेवन से शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कैंसर की जकड़ मजबूत होने लगती है। ऐसा अनुमान है कि धूम्रपान या चबाने वाला तम्बाकू कम से कम 13 अलग-अलग प्रकार के कैंसर को बढ़ावा देता है। इनमें फेफड़े, गला,  किडनी, लिवर, मुंह और पेट का कैंसर प्रमुख हैं।
 
इतना ही नहीं, धूम्रपान करने वाले माता-पिता के बच्चों में फेफड़े और साइनस के संक्रमण की आशंका भी अधिक होती है। तम्बाकू की लत पड़ने पर, उसे छोड़ना आसान नहीं होता। इसके लिए जबरदस्त इच्छाशक्ति और मानसिक दृढ़ता की जरुरत होती है। इसके लिए शरीर, मन और आत्मा का एक होना जरुरी होता है। इसके लिए योग से बेहतर कुछ भी नहीं है। शवासन से विशेष फायदा होता है। योगासन के साथ-साथ शारीरिक व्यायाम भी करते हैं तो सोने पर सुहागा। यह तनाव को कम करता है। तम्बाकू छोड़ने का आपने निश्चय कर लिया है तो कुछ वक़्त तक शराब, चीनी और कॉफी से भी दूरी बनानी होगी। ये तीनों सिगरेट पीने की इच्छा को जागृत करते हैं।

 

तम्बाकू छोड़ने के फायदे

 
1.तंबाकू छोड़ने के फायदे भी बहुत सारे हैं। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार, इसे गुटखा-तंबाकू छोड़ने का असर आपकी सेहत पर जल्दी ही दिखने लगता है। सिगरेट छोड़ने के महज 12 घंटे के भीतर रक्त में कार्बन मोनोक्साइड का स्तर घटकर सामान्य स्तर पर आ जाएगा।
 
2. दो से 12 सप्ताह में खून का दौरा सामान्य हो जाएगा और आपके फेफड़े से ठीक से काम करने लगेंगे।
 
3. अगर आपको सांस व खांसने की लंबे समय से शिकायत है तो 1 से 9 महीने के अंदर यह समस्या दूर हो जाएगी।
 
4. कैंसर का खतरा 50 फीसदी कम हो जाएगा इसलिए सिगरेट या तंबाकू के बने अन्य उत्पादों के सेवन की आदतें जितनी जल्दी छोड दी जाएं उतना बेहतर होगा।
 

(डॉ आर के सोलंकी)

लेखक एसएमएस मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर और मनोरोग विभाग के यूनिट हेड हैं

 

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