Headlines

स्टेट्स

कैसे होता है फलोर टेस्ट, जानिए पूरी प्रक्रिया
floor test

आजकल खबरों में आप कर्नाटक सरकार को लेकर चल रही उथल पुथल की खबरें देख और सुन रहे होंगे कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी की सरकार गिरने का खतरा बना हुआ हैै। ऐसे में उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट यानि शक्ति परिक्षण से गुजरना होगै। आपके लिए भी यह जानना जरूरी है कि आखिर फलोर टेस्ट होता क्या हैै। कोई भी राज्य सरकार हो वह अपने विधायकों की संख्या पर टिकी होती है, कहने का मतलब यह है कि जिसकी विधानसभा यानि सदन में सबसे ज्यादा संख्या बल होता है, उसी की सरकार बनती है, अगर ऐसे में विधायकों की संख्या बल किसी भी कारण कम होती है, जैसे विधायकों के पार्टी बदलने या विधायिकी से इस्तीफा देने से तो सरकार अल्पमत यानि खतरे में आ जाती है, ऐसे में राज्य के गर्वनर यानि राज्यपाल सरकार के मुख्यिा यानि मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने को कहते हैं ताकि उन्हें इस बात का पता लगे कि सरकार में जरूरी विधायक उनके साथ हैं या नहीं। हालांकि, फलोर टेस्ट के दौरान पूरी भूमिका विधानसभा अध्यक्ष की होती हैै।

फ्लोर टेस्ट का दिन विधानसभाध्यक्ष तय करते हैं, उस दिन पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों से मत लिए जाते हैं। उसके बाद ध्वनिमत से विधायकों का पक्ष जाना जाता है। उसके बाद कोरम बैल बजाकर सभी विधायकों को हां या ना गैलरी में बांटकर उनकी गिनती की जाती है। इसके बाद अध्यक्ष फैसले की घोषणा करते हैं। इस प्रक्रिया से सदन में फलोर टेस्ट यानि बहुमत साबित होता है। अगर सरकार चलाने के लिए जरूरी सदस्य संख्या रहती है सरकार बनी रहती है, यदि संख्या में कमी आ जाती है सरकार खतरे में आ जाती है यानि सरकार गिरने का खतरा बढ जाता है।

 

News & Event

Tazaa Khabre