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भारत के पांच दिग्गज क्रिकेटर, फिल्मों में कर चुके हैं काम
sunil gavaskar

भारत में क्रिकेट खिलाड़ी और फिल्म स्टार एक अलग ही दर्जा रखते हैं, दोनों ही क्षत्रों के पेशेवर भारत में एक एक स्टार माने जाते हैं, यह देश में सबसे ज्यादा भुगतान वाले पेशेवर भी हैं। जाहिर सी बात है यह लोग कुछ भी करें एक चर्चा का विषय बन जाता है। दोनों ही क्षेत्रों के पेशवरों का आपस में रिश्ता भी बहुत अच्छा है। जहां फिल्म स्टार्स क्रिकेट खेलने के शोकीन हैं वहीं कई क्रिकेटर्स ऐसे भी हैं जो फिल्मों में काम भी कर चुके हैं।


सुनील गावस्कर


देश के मशहूर क्रिकेटर लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर भारत के लिए कई मैचों में एक स्टार की भूमिका में रह चुेके हैं और टीम को जीत दिला चुके हैं, लेकिन, वह फिल्मा में भी काम कर चुके हैं, उन्होंने पहली बार एक मराठी फिल्म में अभिनय किया, फिल्म सावली प्रेमची थी और 1980 में आई। 1988 में नसीरुद्दीन शाह की चर्चित फिल्म मालामाल में भी अभिनय किया था। इस फिल्म में वह क्रिकेट खेलते हुए नजर आए थे। इसमें उन्होंने  अतिथि भूमिका निभाई थी, गावस्कर ने एक मराठी गीत, ये दुनीमाधये थम्बायाला वेल कोनला भी गाया है, जो काफी लोकप्रिय हुआ और जिसमें क्रिकेट मैच और जीवन के बीच समानता को दर्शाया गया।

अजय जडेजा


भारतीय क्रिकेट टीम के सफल खिलाडिय़ों में से एक अजय जडेजा 1990 के दशक में भारतीय टीम में प्रमुख खिलाडिय़ो में से एक थे। उन्होंने कई बार वनडे टीम की कप्तानी भी की। हालाँकि, मैच-फिक्सिंग कांड ने उनके करियर को पहले ही खत्म कर दिया था, इसके बाद वह फिल्मों की तरफ मुड़ गए। इसलिए, उन्होंने बॉलीवुड में अपना हाथ आजमाया और यहां तक कि 2003 की फिल्म खेल में एक प्रमुख भूमिका निभाई। लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म के बुरी तरह पिट जाने के बाद उन्होंने पूरी तरह फिल्मों से दूरी बना ली और तब से क्रिकेट कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषक की भूमिका निभा रहे हैं। जडेजा ने 15 टेस्ट मैच और 196 एकदिवसीय मैच खेले। उन्हें मैच फि़क्सिंग के कारण 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। उनके प्रतिबंधित करने को 27 जनवरी 2003 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिखंडित करना करते हुए उन्हें घरेलू और अन्तराष्ट्रीय क्रिक्रेट खेलने के योग्य करार दिया।  अजयसिंहदौलतसिंह जड़ेजा का जन्म 1 फऱवरी 1971 को जामनगर, गुजरात में जड़ेजा राजपूत परिवार में जो नवानगर में राज्य करने से जुड़ा है में हुआ। वो 1992 से 2000 तक भारतीय क्रिकेट टीम के नियमित खिलाड़ी थे

विनोद कांबली


सचिन तेंदुलकर के साथ, विनोद कांबली 1990 के दशक में मुंबई से निकलने वाली सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं में से एक थे। लेकिन, कुछ ऐसे हालात बने कि उनका (विनोद कांबली) अच्छा खास करियर चौपट हो गया। कहते हैं कि अगर कांबली टीम में होते तो आज सचिन तेंदुलकर रिकॉर्डों में टक्कर देते। आपको जानकर हैरत होगी कि विनोद कांबली ओर सचिन तेंदुलकर बचपन के दोस्त हैं। एक साथ पढ़े, एक साथ क्रिकेट खेले, एक ही गुरू से टे्रनिंग ली और तकरीबन एक ही साथ टीम इंडिया के लिए खेले। लेकिन, कहते हैं ना कि होनी को कुछ और ही मंजूर था। सचिन लगातार कामयाबी की सीढ़ी चढ़ते गए। सचिन का शांत स्वभाव ओर खेल के प्रति अनुशासन और शिष्टाचार उनके लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करता गया, जबकि कहा जाता है कि विनोद कांबली के पास अनुशासन की कमी थी।
कांबली ने क्रिकेट में नाकाम होने और अपने करियर के प्रभावी रूप से समाप्त होने के बाद 2000 में  उन्होंने सुनील शेट्टी के साथ फि़ल्म अनर्थ में अभिनय किया। लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद उन्होंने पल दो पाल का साथ ओर कन्नड़ फिल्म में भी काम किया लेकिन, उसमें वह सफल नहीं हो सके और उनका फिल्मी करियर भी समाप्त हो गया।

कपिल देव


कपिल देव उन महान भारतीय क्रिकेटर्स में से एक हैं जिन्होंने 80 के दशक में एक महान भारतीय सुपरस्टार क्रिकेटर का खिताब हासिल किया था। वह क्रिकेट की एक सनसनी के रूप में उभरे थे। उनका यह जलवा आज भी कायम है, उन्हें आज भी वही सम्मान हासिल है जो 1983 में भारत के लिए वल्र्ड कप जीतने के बाद मिला था। उन्हें भारत के लिए एक तेज गेंदबाज के रूप में बड़ी सफलता मिली, ऐसे समय में जब देश अपने स्पिनरों के लिए अधिक जाना जाता था। यहां तक कि उन्होंने 1983 में अपनी पहली विश्व कप जीत के लिए देश का नेतृत्व किया। कपिल देव ने काफी कुछ फिल्मों में बिट-पार्ट भूमिका निभाई है, हालांकि उनमें से हर एक में उन्होंने खुद को किसी अन्य काल्पनिक चरित्र के बजाय निभाया। वह इकबाल, मुझसे शादी करोगी’, स्टंप्ड , जैसी फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। । वे विस्डेन द्वारा वर्ष 2002 में 'सदी के भारतीय क्रिकेटर' चुने गये। वे 10 माह के लिये भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशिक्षक भी रहे थे। कपिलदेव का जन्म चंडीगढ़ में हुआ। उनका विवाह रोमी भाटिया से सन 1980 में हुआ। उनकी बेटी, अमिया देव का जन्म 16 जनवरी, 1996 को हुआ।

सैयद किरमानी

आज महेंद्र सिंह धोनी का जलवा देश ही नहीं पूरे क्रिकेट जगत में है। उन्हें विकेट कीपिंग के साथ शानदार बैटिंग के लिए भी जाना जाता है। लेकिन, क्या आपको पता है, धोनी आज जिस जगह पर हैं,उस जगह पर एक विकेट कीपर भी रह चुका है जिसकी लोकप्रियता धोनी से भी ज्यादा थी। हम बात कर रहे हैं भारत के पहले मुस्लिम विकेट कीपर सैयद किरमानी की। किरमानी कनार्टक के बैंगलोर से थे।  किरमान भारत की विश्व कप क्रिकेट की विजेती टीम के सदस्य भी थे। सैयद किरमानी ने एक फिल्म में अभिनय किया, और उन्होंने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह 1985 की फिल्म 1985 कभी अजनबी ’थी, और उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि नायक एक अन्य लोकप्रिय क्रिकेटर भी था, जिसकी पहचान अगली स्लाइड में सामने आएगी। किरमानी एक अन्य फिल्म में स्वयं एक कैमियो भूमिका में दिखाई दिए। यह 2012 में मलयालम फिल्म मजविलिलिनट्टम वारे में थी। किरमानी अपने अलग और डेशिंग स्टाइल के लिए काफी पॉपुलर थे। उनका अंदाज बहुत निराला था। जब वह क्रिकेट मैदान पर आते थे मैदान पर उनके नाम की आवाजों से गूंज उठता था। सैयद किरमानी भारत के सबसे कुशल विकेटकीपरों में से एक थे, जिन्होंने काफी रिकॉर्ड बनाए। उन्हें 1983 के विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर चुना गया, जिसे भारत ने जीता था, और जिम्बाब्वे के खिलाफ 175 रन की उस ऐतिहासिक पारी के दौरान कपिल देव के पार्टनर बैट्समैन भी थे।

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