राजस्थान विधानसभा: नागरिकता कानून बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास, पढ़िए खबर से जुड़ा पूरा अपडेट
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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया गया है। इसके अलावा राजस्थान ऐसा पहला राज्य भी बन गया है जहां सीएए के साथ ही एनपीआर में हुए संशोधन के खिलाफ संकल्प पास किया। राजस्थान से पहले केरल और पंजाब में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव हो चुका है।

विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाना असंवैधानिक: डॉ सतीश पूनियां

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने आज विधानसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक के पक्ष में बोलते हुए कहा कि इस विधेयक के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी का आभार एवं अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के प्रताड़ित हिंदू, सिख ईसाई, पारसी, जैन एवं बौद्ध विस्थापितों के दर्द को महसूस कर भारत की नागरिकता देने का काम किया।

प्रदेशाध्यक्ष डॉ. पूनिया ने कहा कि संसद से पारित विधेयक व केंद्र की सूची अंतर्गत आने वाले विषयों को कोई भी राज्य सरकार चुनौती नहीं दे सकती। विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाना पूर्णतया असंवैधानिक है। पंडित जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना की महत्वकांक्षाओं के कारण धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ जिसे कांग्रेस ने स्वीकारा और भारत धर्मनिरपेक्ष तथा पाकिस्तान कट्टर इस्लामी देश बना। दोनों देशों के बीच हुए समझौते में अल्पसंख्यकों के सम्मान की रक्षा होगी, यह बात लिखी गई। भारत इस समझौते पर खरा उतरा, लेकिन पाकिस्तान खरा नहीं उतर सका।

गहलोत ने कही बड़ी बात
नागरिकता कानून बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास होने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री ने ताबड़तोड़ ट्वीट कर कहा, हमारा संविधान किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है। राष्ट्र के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई कानून बनाया गया है जो धार्मिक आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करता है।

#Rajasthan Assembly has passed a resolution today against the #CAA and we have urged the Central govt to repeal the law as it discriminates against people on religious grounds, which violates the provisions of our Constitution.
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— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 25, 2020

यह हमारे संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और हमारे संविधान के अनुच्छेद 14 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राज्य कानून के समक्ष किसी भी व्यक्ति की समानता या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण से इनकार नहीं करेंगे। सीएए इस लेख का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करता है इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

It is noteworthy that a large number of states have been opposing #NRC_CAA keeping in mind public opinion at large. It is duty of centre govt to keep federal structure intact n strong, I urge NDA govt to come forward and withdraw the act. Govt should not make it a prestige issue.

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 25, 2020

एक अन्य ट्वीट में  गहलोत ने लिखा, राजस्थान विधानसभा ने CAA के खिलाफ आज एक प्रस्ताव पारित किया है और हमने केंद्र सरकार से कानून को निरस्त करने का आग्रह किया है क्योंकि यह धार्मिक आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करता है, जो हमारे संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

The term secular in the Constitution of India means that all the religions in India get equal respect, protection and support from the State. CAA aims to change this basic principle. For this very reason, CAA has been opposed across the country.
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— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 25, 2020

Article 14 clearly states that the State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India. CAA clearly violates this article therefore it should be repealed.
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— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 25, 2020

Our Constitution prohibits any kind of discrimination. This is the first time in the history of the nation that a law has been enacted which discriminates people on religious grounds. It violates secular principles of our constitution and also Article 14 of our Constitution.
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— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 25, 2020

 

 

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